Uphar – Lyrics
आ गया हूं मैं यहां तक मुझे पता ही नहीं मैं छा गया
मिलाके खुद को आसमान से फिर से जमीन पे आ गया
मैं चाहता खुद से बात करूं खुदा मेरे अंदर समा गया
हिम्मत के चूल्हे में ज्वाला नहीं मैं आंधी लेके आ गया
ढूंढ रहा था बुद्ध को मैं मिला ही नहीं हां खुद को
ले गया खुद को वहां जहां भूल सकूं न शुद्ध को
ख्वाहिश छोटे पत्थर की मिल गया पूरा पहाड़
किस्तों में चाहिए था जीवन मिला है मुझे उपहार
मिटाना चाहो मिटा दो मुझे इस खून को कैसे तुम रोकोगे
हर क़तरे से जन्मेगा फिर से एक दानव इस धुन को कैसे तुम रोकोगे
जवाब में सुनो समझौते का दौर है सच पे टिकी है दुनिया
और अगले ही पल मैं फिर से मिटा दूंगा कितने भी जन्म ले तेरी दुनिया
आति मूसिब्ते आने दो इसी से होता मजबूत एक इंसा
वरना कमजोर हो जाएंगे हम इसी से कायम रहेगी अहिंसा
फिर भी जब-जब जरूरत पड़ेगी तलवार की धार पे चलेंगे
और दिखा देंगे खुद के अंदर के डर को तेरे से कभी ना डरेंगे
चढ़ाना पड़ेगा पहाड़ पे चढ़ेंगे खुद के दर्द से लड़ेंगे
गिरने का डर तो सताएगा मुझे मन में जुनून को भरेंगे
आंखों में ताकत खुद पे भरोसा जंग की जीत पे चलेंगे
खून पसीना प्याले में मंजिल को भेंट हम करेंगे
आगे बढ़ाने की ताकत कर्मों से मिली ना कि फल की इच्छा झूठे धर्मों से कोई देख रहा मुझे मेरे जन्मों से चलता है साथ मेरे कदमों से
ऊर्जा झोंक दी मैंने साड़ी की साड़ी चढ़ गया ऊंचे पहाड़ पे हूं
कहनें को सब कुछ मिल गया मुझे लगता है फिर भी उधार में हूं
आ गया हूं मैं यहां तक मुझे पता ही नहीं मैं छा गया
मिलाके खुद को आसमान से फिर से जमीन पे आ गया
मैं चाहता खुद से बात करूं खुदा मेरे अंदर समा गया
हिम्मत के चूल्हे में ज्वाला नहीं मैं आंधी लेके आ गया
ढूंढ रहा था बुद्ध को मैं मिला ही नहीं हां खुद को
ले गया खुद को वहां जहां भूल सकूं न शुद्ध को
ख्वाहिश छोटे पत्थर की मिल गया पूरा पहाड़
किस्तों में चाहिए था जीवन मिला है मुझे उपहार
दुखों का पूरा समंदर यहां चारों तरफ बस दुख है
सुखों का नामो निशान नहीं नाम पे बस मिराज है
आज है कल नहीं ये दुनिया तो दुखों का प्याज है
परतों में छुपा एक राज है ये दुनिया तो बस एक मिराज है
निकलने का रास्ता खुद से ही है रहना है दिल के करीब
खुदा के दिल के करीब रहना है खुद से शरीफ
हां होगी थोड़ी तकलीफ निशाने पे रहना सटीक
समय के साथ सब ठीक ये जीवन नहीं है भीख
वचनों का सही उपयोग करने की चीज है योग
इससे होता नहीं कोई रोग करने की चीज है योग
हां करने की चीज है हां करने की चीज है योग
दिखा नहीं सकते सही रास्ता दिखाना नहीं कभी गलत
चलो सच के सफर में समय जाएगा पलट
ईश्वर के हृदय से हर गलती की माफी है
गलती हो जाए हमसे स्वीकार करना ही काफी है
स्वीकार करें वो कायर नहीं जो सच न कहे वो शायर नहीं
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| Song | Uphar |
| Artist | Zeal Vision |
| Album | Uphar |
| Language | Hindi |
| Year | 2024 |
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