KATL – Lyrics
आया था दुनिया में क्या लाया था
गया था वही फिर से गया था
मिट्टी का शरीर या फिर साया था
लिखने को बैठूं मैं जब भी खाली है दिमाग
जब भी सोचूं कुछ भी बचा नहीं बचता है सिर्फ आग
खुद ही आस्तीन का सांप या फिर चारों तरफ नाग
जागना है जाग या फ़िर जीवन लेकर भाग
बेटे जागना है जाग या फ़िर जीवन लेकर भाग
बड़ी मेहनत के बाद बनके आया मैं चिराग
मिला के सारे तत्व बना हूं मैं विराग
मेरे कर्मों को देख लोगों को लगता है निराग
Don't worry. No harm is done.
थोड़ी आशा की किरण मैं बांटू जन-जन
कण-कण में मिला दूं मेरे कर्मों का धन
धड़कन में बसें चमके तन मन
मैंने कहा I see. Does it have a guarantee?
Yes, I have this reality.
आवाज आई यहीं से अंदर कहीं से
भावनाओं को समेट बहा दे वहीं से
मैंने ध्यान नहीं दिया जो साथ खड़े थे
मैंने ध्यान दिया उसे जो साथ नहीं थे
मैंने बात नहीं की जो साथ लरे थे
जज्बात नहीं बाटी जो साथ मरें थे
कैसे मैं देखूं शीशे में शक्ल
गुजारिश है थोड़ी सी दे दे अक्ल
ना आगे ना पीछे ना देखा बगल
मैं करता गया अपनों का कत्ल
गीता को गले से खुद को कृष्ण के चरणों में
मैं रोक नहीं पाया गया हरि के शरणों में
कर्म है सर्वोपरि भगवान के वरणों में
तमाम गलतियों के बाद ज्ञान के झरनों में
Switch on the light भेजे की बत्ती जला
Don't stretch the matter गुस्सा गला
मिलेगी सुंदर बला पेश कर अपनी कला
Please note it down ये दिल की सलाह
काट डालू कैसे मैं अपने हाथ पैर
सामने खड़े हैं सारे अपने हैं ना ग़ैर
वैर नहीं उनसे करते थे साथ सैर
दिल में प्यार नहीं रहा अब थूकते हैं खैर
मेरे हाथों संघार लाल खून ही खून
चुनचुन के मारू अंदर है ईश्वर की धुन
जितनी चाहे फैलाओ ऐसी चादर तो बुन
My name is ZEAL VISION सच्चाई तो सुन
मैंने ध्यान नहीं दिया जो साथ खड़े थे
मैंने ध्यान दिया उसे जो साथ नहीं थे
मैंने बात नहीं की जो साथ लरे थे
जज्बात नहीं बाटी जो साथ मरें थे
कैसे मैं देखूं शीशे में शक्ल
गुजारिश है थोड़ी सी दे दे अक्ल
ना आगे ना पीछे ना देखा बगल
मैं करता गया अपनों का कत्ल
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| Song | KATL |
| Artist | Kritika Kavya |
| Album | KATL |
| Language | Hindi |
| Year | 2024 |
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KATL lyrics by Kritika Kavya. From the album KATL. Read full lyrics and download the MP3 in HD quality on MP3Maza.